नहीं रहे एसपीजी जवान मनिष कुमार सिंह जिंदगी के जंग हार गए एसपीजी के जवान मनीष कुमार सिंह,मौत की खबर सुनते ही उमगा ग़ांव में छाया मातम,देर रात दिल्ली से उमगा लाया जाएगा उनका शव

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 प्रभु सिंह कुणाल

जिंदगी का एक कटु सत्य है कि,जिंदगी अस्थायी है।कब किसके साथ क्या हो जाएगा कोई नही जानता है।कुछ ऐसा ही हुआ देश के सुरक्षा में तैनात एसपीजी के जवान मनीष कुमार सिंह के साथ।लगभग 34 घंटो से अस्पताल में जिंदगी से लड़ते हुए आखिरकार गुरुवार की रात्रि जिंगदी की जंग हार गए और सदा के लिए नींद में सो गए।मौत की खबर सुनते ही पूरे इलाके में मातम सा छा गया।बताते चलें कि,मदनपुर थाना क्षेत्र के उमगा ग़ांव के बिंदेश्वर सिंह के होनहार और हर दिल अजीज सुपुत्र मनीष कुमार सिंह की मौत उस समय हो गयी जब वो एसपीजी के प्रशिक्षण के दौरान दौड़ने के क्रम में गिर गए और उन्हें गंभीर चोटें आई।उसके बाद वो बेहोश हो गए।बेहोशी के क्रम में उन्हें दिल्ली के द्वारिका अस्पताल में भर्ती किया गया।डॉक्टरों के अथक प्रयास के बावजूद भी उन्हें नही बचाया जा सका।लगभग 34 घंटो तक अस्पताल में रहने के बाद उनकी आंखें सदा के लिए बंद हो गयी।

ग्रामीण अवधेश सिंह,राकेश सिंह,युगलकिशोर सिंह, योगेंद्र सिंह,धीरज कुमार सिंह,मोनू कुमार,बहादुर कुमार,नीरज सिंह,पंकज कुमार,बंटी कुमार,शशि कुमार आदि ने जानकारी देते हुए बताया कि,उनकी मौत की खबर से पूरे ग़ांव में मातम छा गया।उनके दादा श्रवण कुमार सिंह,दादी रामकली देवी का रो रोकर बुरा हाल है।बताया कि,मनीष कुमार सिंह 2004 में सीआरपीएफ में सिपाही के तौर पर बहाल हुए थे।2008 में सब इंस्पेक्टर के रूप में पदोन्नति पाकर गया जिले के बाराचट्टी में तैनात हो गए।2018 में राजगीर में कोबरा-205 बटालियन में इंस्पेक्टर के रूप में पदोन्नति पाई।राजगीर से ही दिल्ली में एसपीजी के रूप में चयन हुआ और वो दिल्ली प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए चले गए।प्रशिक्षण के दरम्यान दौड़ने के क्रम में गिर गए और उन्हें गंभीर चोटें आई और बेहोश हो गए।विभाग के द्वारा उन्हें दिल्ली के द्वारिका अस्पताल में भर्ती किया गया जहां पर गुरुवार की रात्रि उनकी मौत हो गयी।

 

उनकी शादी 2009 में हुई थी।उनका एक 10 वर्षीय पुत्र आदर्श कुमार और 8 वर्षीय पुत्री आरुषि कुमारी है।ग्रामीणों के अनुसार मनीष कुमार बेहद ही मिलनसार प्रवृति के थे और हर किसी के सुख-दुःख में भागीदार होते थे।वे अपने शालीनता के लिए जाने जाते थे और युवाओं के प्रेरणाश्रोत थे।उनके चले जाने से युवाओं में हताशा का माहौल है।लोग उनके शव के इन्तेजार में टकटकी लगाए बैठे हैं।लोगों ने बताया कि,शुक्रवार की देर रात्रि दिल्ली से उनका शव पैतृक गांव उमगा लाया जाएगा उसके बाद शनिवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा।

 

 

 

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