इंग्लैंड ने पांच बार की चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हराकर वर्ल्ड कप फाइनल में बनाई जगह

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मनोज कुमार
आईसीसी वर्ल्ड कप मुकाबले में एजबेस्टन मैदान पर खेले गए दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हराकर इंग्लैंड वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंच गया है. 1992 के बाद पहली बार है जब इंग्लैंड की टीम वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची है.

इंग्लैंड को 18वें ओवर में पहला झटका लगा और जॉनी बेयरस्टो मिचेल स्टार्क की गेंद का शिकार हुए. उनके बाद 20वें ओवर में जेसन रॉय अंपायर के गलत फैसले का शिकार हुए और 85 रन पर पवेलियन लौटना पड़ा. गेंद उनके बल्ले नहीं लगी थी लेकिन अंपायर के आउट देने के बाद उन्हें लौटना पड़ा.

इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी की और 48 ओवर में 223 रन पर ऑल आउट हो गई. वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने के लिए इंग्लैंड की टीम को 50 ओवर में 224 रन बनाने होंगे.

स्मिथ ने 119 गेंदों पर 85 और एलेक्स कैरी ने 70 गेंदों पर 46 रन बनाए. इंग्लैंड के लिए क्रिस वोक्स और आदिल राशिद ने 3-3 और जोफ्रा आर्चर ने 2 विकेट लिए.

ऑस्ट्रेलिया का पहला विकेट 4 रन के स्कोर पर गिरा. कप्तान फिंच बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए. उन्हें जोफ्रा आर्चर ने चलता किया. उनके बाद डेविड वॉर्नर (9) और पीटर हैंड्सकॉम्ब (4) आउट हुए. इन दोनों बल्लेबाजों को क्रिस वोक्स ने पवेलियन का रास्ता दिखाया.

यहां से टीम संभलती इससे पहले एलेक्स कैरी 46 रन बनाकर आउट हो गए. उनके बाद मार्कस स्टोइनिस शून्य पर और मैक्सवेल 22 रन बनाकर पवेलियन लौटे. पैट कमिंस भी 6 रन बनाकर आउट हो गए.

बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई टीम आईसीसी वर्ल्ड कप के इस संस्करण के ग्रुप चरण में 9 मैचों में 7 जीत और 2 हार के साथ 14 अंक लेकर दूसरी नंबर पर थी. वहीं, इंग्लैंड की टीम 9 मैचों में 6 जीत और 3 हार के साथ 12 अंक लेकर तीसरे नंबर पर थी.

मौजूदा चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली टीम बनी थी, जबकि इंग्लैंड ने भारत और न्यूजीलैंड को हराकर सेमीफाइनल में अपना स्थान पक्का किया था.

ऑस्ट्रेलियाई टीम साल 1975, 1987, 1996, 1999, 2003, 2007 और 2015 के फाइनल में पहुंच चुकी है, जिसमें वह 1975 और 1996 में उपविजेता थी, बाकी हर बार उसने खिताब पर कब्जा जमाया है. दूसरी तरफ इंग्लैंड की टीम इससे पहले 1979, 1987 और 1992 में फाइनल में पहुंच चुकी है, क्ष तीनों बार उसे उप विजेता बनकर ही संतोष करना पड़ा.

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