भोजपुर जिले के कृषि विभाग को सूखा किसे कहते है इसका परिभाषा ही नही मालूम :-भाई दिनेश

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कृषि विभाग सूखा ग्रस्त का परिभाषा ही नही जानते जिसके कारण परती पड़े खेत को सूखाग्रस्त घोषित करने का प्रस्ताव भेज दिए और जो धान का फसल का रोपनी हुआ और रोपनी के बाद वर्षा नही होने और नहर के निचले हिस्से तक पानी नही पहुचने से फसल सुख रहे है या सुख गए उसको सूखा प्रभावित नही मान रहे है ।
भोजपुर के किसानों को जाती -पार्टी ,धर्म भेद से ऊपर उठकर इसके लिए आवाज उठाना होगा ।
मैंने कल ही कृषि पदाधिकारी भोजपुर के चेम्बर जा कर कहा है कि आपने जो भोजपुर जिले के 14 प्रखण्ड के मात्र 14 पँचायत को सुखा ग्रस्त घोषित कर सरकार के पास रिपोर्ट भेजा है उसका मापदण्ड का पैमाना सार्वजनि करे नही तो आपके चेम्बर में बैठेंगे ।
जो खेत का रोपनी नही हुआ पानी के अभाव में तो उसे अकाल ग्रस्त घोषित होने चाहिए और जो खेत मे फसल लगा और सिचाई के अभाव में सुख गया और सुख रहा है उसे सूखा ग्रस्त घोषित होना चाहिए ।
मैंने कहा कि भोजपुर कृषि विभाग अगले साल भी इसी तरह से जहाँ बाढ़ आता है उस इलाके को सूखा ग्रस्त घोषित कर दिया जिसका परिणाम स्वरूप उस क्षेत्र के लोगो को बाढ़ और सुखार दोनों का अनुदान मिल गया और जहाँ सुखार हुआ वहाँ के किसान को अनुदान नही मिल पाया ।
सवाल उठता है कि एक ही क्षेत्र कैसे बाढ़ और सुखार प्रभावित हो सकता है ?