Saturday, March 7, 2026

मुनीर को सीडीएफ बनाने में हिचक रहे शाहबाज शरीफ……..छुटटी मनाने नवाज के पास लंदन पहुंचे

कराची। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को 29 नवंबर 2022 को सेना प्रमुख (सीओएसए) बनाया गया था, और उनका 3 साल का मूल कार्यकाल 29 नवंबर 2025 को समाप्त हो गया है। हालाँकि, पिछले साल पाकिस्तान की संसद ने कानून में संशोधन करके सेना प्रमुख का कार्यकाल 3 से बढ़ाकर 5 साल कर दिया था। इस कानूनी बदलाव के कारण, वह तकनीकी रूप से 2027 तक सीओएसए के पद पर बने रह सकते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया है, जो उन्हें जनरल अय्यूब खान के बाद यह पद प्राप्त करने वाला पाकिस्तान का दूसरा अधिकारी बनाता है। पाकिस्तान के संविधान में 27वां संशोधन किया है, जिसने चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) का नया और बेहद शक्तिशाली पद बनाया है। यह पद उन्हें तीनों सेनाओं (थल सेना, वायु सेना और नौसेना) का प्रमुख बनाता है और 5 साल के लिए तय कार्यकाल देता है, जिसका अर्थ है कि वह 2030 तक इस पद पर बने रह सकते हैं। लेकिन सबसे बड़ी खींचतान सीडीएफ पद के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी होने को लेकर है। 27 नवंबर को चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीजेसीएससी) के चेयरमैन लेफ्टिनेंट जनरल साहिर शमशाद मिर्जा रिटायर हो गए, जिसके बाद सीडीएफ का पद प्रभावी होना था। 29 नवंबर की समय सीमा बीतने के बावजूद, सीडीएफ पद पर आसिम मुनीर की नियुक्ति की अधिसूचना अब तक जारी नहीं हुई है।
सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कथित तौर पर मुनीर को सीडीएफ बनाने से हिचक रहे हैं, क्योंकि इससे मुनीर के पास असीमित शक्तियां आ जाएंगी (जिसमें देश के परमाणु कमांड पर नियंत्रण भी शामिल है)। शहबाज शरीफ इस बीच विदेश दौरे (लंदन) पर हैं। लंदन में बैठे नवाज शरीफ का भी इस निर्णय पर प्रभाव हो सकता है, और संभवतः वह अधिसूचना जारी न करने के पक्ष में हैं, जबकि शहबाज शरीफ पर दबाव है कि इसे जारी किया जाए। इस देरी के कारण पाकिस्तान में एक असामान्य सैन्य नेतृत्व की स्थिति पैदा हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि सीडीएफ की अधिसूचना जारी न होने के कारण आसिम मुनीर की संवैधानिक स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह संशोधन मुनीर को अभूतपूर्व शक्तियाँ देता है, जिससे वह प्रधानमंत्री से भी ज्यादा ताकतवर हो गए हैं।  यह उन्हें आजीवन कानूनी कार्रवाई से प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
उन्हें तीनों सेनाओं का बॉस और परमाणु कमांड का कंट्रोलर बनाया गया है। इसने न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र को भी सीमित कर दिया है, जिससे न्यायपालिका का पुनर्गठन हुआ है। संयुक्त राष्ट्र (मानवाधिकार) के हाई कमिश्नर वोल्कर टर्क ने भी इस संशोधन को न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने वाला और सेना का प्रभाव बढ़ाने वाला बताया है।
आसिम मुनीर का सेना प्रमुख के रूप में मूल कार्यकाल समाप्त हो गया है, लेकिन कानून में संशोधन के कारण वे पद पर बने हुए हैं। उन्हें फील्ड मार्शल का पद मिला है और उन्हें सीडीएफ बनना है, जो उन्हें असीमित शक्ति देगा, लेकिन सीडीएफ पद की अधिसूचना प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा रोके जाने के कारण अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे पाकिस्तान में सेना और नागरिक सरकार के बीच तनाव स्पष्ट है।

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News Desk

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