Wednesday, March 11, 2026

होम लोन पर मिली राहत, EMI में आएगी कटौती

घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों और मौजूदा कर्जदारों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है. आपकी जेब पर पड़ने वाला ईएमआई (EMI) का बोझ अब हल्का होने वाला है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे होम लोन की ब्याज दरें ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच सकती हैं |

रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों (basis points) की कटौती की है, जिससे यह घटकर 5.25% पर आ गया है. इस फैसले का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा. वर्तमान में यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन ओवरसीज बैंक जैसे कई बैंक 7.35% की दर पर होम लोन दे रहे हैं. जानकारों का मानना है कि रेपो रेट में कटौती के बाद ये दरें गिरकर 7.1% तक आ सकती हैं |

1,440 रुपये की सीधी बचत

मतलब यदि आपने 15 साल के लिए 1 करोड़ रुपये का होम लोन लिया है, तो 0.25% की कटौती का मतलब है कि आपकी मासिक ईएमआई में लगभग 1,440 रुपये की सीधी बचत होगी. साल भर में यह बचत एक बड़ी रकम बन जाती है, जो मध्यम वर्गीय परिवार के लिए बड़ी राहत है. हालांकि, 7.1% की ब्याज दर का लाभ नए ग्राहकों को देने के लिए बैंकों को अपनी रणनीतियों में बदलाव करना होगा. बैंकर्स का कहना है कि इतनी कम दर पर लोन देने के लिए उन्हें अपनी जमा दरों (Deposit Rates) में भी भारी कटौती करनी पड़ेगी. जब तक डिपॉजिट रेट कम नहीं होते, बैंकों के मुनाफे (Net Interest Margins) पर दबाव देखने को मिल सकता है. यही नहीं, अगर बैंक बेंचमार्क रेट के ऊपर अपने स्प्रेड (Spread) को संशोधित करते हैं, तो एक दिलचस्प स्थिति बन सकती है|

आम आदमी को मिलेगी बड़ी राहत

जहां बैंकों को अपनी ब्याज दरें समायोजित करने में थोड़ा समय लग सकता है, वहीं नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) को इसका फायदा तुरंत मिलेगा. श्रीराम फाइनेंस के कार्यकारी उपाध्यक्ष उमेश रेवणकर का कहना है कि यह नीति विशेष रूप से ‘लास्ट-माइल फाइनेंसर’ यानी दूर-दराज के इलाकों में काम करने वाली वित्तीय कंपनियों के लिए बहुत मददगार है |

आरबीआई द्वारा लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद (OMO) की घोषणा से बाजार में नकदी का प्रवाह बना रहेगा. इसका सीधा फायदा छोटे ट्रक मालिकों, ग्रामीण उद्यमियों और MSME सेक्टर के उन लोगों को मिलेगा, जो देश की 8.2% विकास दर (GDP Growth) के असली इंजन हैं. ब्याज दरें कम होने से जमीनी स्तर पर काम करने वाले इन छोटे व्यापारियों को सस्ता कर्ज मिल सकेगा |

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles