Tuesday, March 10, 2026

बड़ा खुलासा! 2,157 स्कूलों की 1 लाख से ज्यादा छात्राओं की स्कॉलरशिप अटकी, जानें क्यों?

झारखंड के 2,157 सरकारी स्कूलों की छात्राओं को सावित्रीबाई फूले किशोरी समृद्धि योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. दरअसल, इन स्कूलों ने अभी तक ई-विद्यावाहिनी के माध्यम से आवेदन नहीं किया है. इस वजह से 2 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों में 8वीं से 12वीं कक्षा तक की छात्राओं को स्कॉलरशिप नहीं मिल पा रही है. इनमें से अधिकांश स्कूल वैसे हैं जो मीडिया या फिर अपग्रेडेड हाईस्कूल हैं. ये स्कूल यू डायस पर छात्राओं का नाम नहीं चढ़ा सके हैं. इनमें सबसे ज्यादा 405 स्कूल पलामू जिले के हैं.

गिरिडीह में 298, रांची में 196, गुमला में 208, गोड्डा में 122 और साहिबगंज में 116 स्कूल पलामू जिले के हैं. 1 लाख से ज्यादा छात्राओं को स्कॉलरशिप नहीं मिल पा रही है. गौरतलब है कि दूसरी ओर ई-कल्याण पोर्टल के माध्यम से दी जाने वाली प्री और पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप की राशि भी 1 साल से साढ़े 6 लाख से ज्यादा बच्चों को नहीं मिली है.

किस वजह से नहीं मिल पा रही स्कॉलरशिप
जिन स्कूलों में छात्राओं को सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना का लाभ नहीं मिल सका है, उनमें बोकारो को 16, चतरा के 13, देवघर के 35, धनबाद के 43, दुमका के 73, गढ़वा के 97, गिरिडीह के 298, गुमला के 208, गोड्डा के 122, हजारीबाग के 49, जामताड़ा के 5, खूंटी के 76, कोडरमा के 11, लातेहार के 69, लोहरदगा के 20, पाकुड़ के 61, पलामू के 4055, पश्चिमी सिंहभूम के 73, पूर्वी सिंहभूम के 43, रामगढ़ के 16, रांची के 196, साहिबगंज के 116, सरायकेला के 24 और सिमडेगा के 74 स्कूल शामिल हैं.

क्यों दी जाती है सावित्रीबाई फुले स्कॉलरशिप!
हेमंत सरकार की सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना के तहत 8वीं कक्षा की छात्राओं को 2500, 9वीं की छात्राओं को 2500, 10वीं की छात्राओं को 5000, 11वीं की छात्राओं को 5000 और 12वीं की छात्राओं को 5000 रुपये मिलते हैं. वहीं स्नातक करने पर एकमुश्त 20,000 रुपये की रकम मिलती है. इस योजना से बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिला है.

दरअसल, देखा गया था कि सीमित संसाधन होने पर माता-पिता बेटों की बढ़ाई पर खर्च करने का विकल्प चुनते थे तो ऐसे में सरकार ने खुद खर्च उठाने का फैसला किया.

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