Wednesday, March 4, 2026

4 शुभ योग में कल लाभ पंचमी,जानें इस दिन कछुआ खरीदना क्यों है शुभ, मां लक्ष्मी की होगी कृपा

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लाभ पंचमी है, जिसे सौभाग्य और ज्ञान पंचमी भी कहते हैं. लाभ पंचमी को आमतौर पर सौभाग्य और ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व दीपावली के पांच दिन बाद आता है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन विशेष पूजा और शुभ कार्य करने से व्यवसाय और जीवन में लाभ की प्राप्ति होती है. पंचांग के अनुसार, लाभ पंचमी के दिन रवि योग, शोभन योग समेत कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. शुभ योग में माता लक्ष्मी और गणेशजी की पूजा करने से हर सुख की प्राप्ति होती है और सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं. आइए जानते हैं लाभ पचंमी पर कौन से शुभ योग बन रहे हैं और इस पर्व का महत्व…
लाभ पंचमी पर शुभ योग
द्रिक पंचांग के अनुसार, रविवार के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय शाम 4 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 41 मिनट तक रहेगा. इस दिन सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक वृश्चिक राशि में रहेंगे. इसके बाद धनु राशि में गोचर करेंगे. लाभ पंचमी के दिन गुरु-बुध की युति से नवपंचम राजयोग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और शोभन योग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है.
लाभ पंचमी का महत्व
लाभ पंचमी, दीपावली के बाद मनाई जाने वाली एक अत्यंत शुभ पंचमी तिथि है. इसे सौभाग्य पंचमी, ज्ञान पंचमी या लाभ पंचमी के नाम से जाना जाता है. यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी को आती है और दीपावली पर्व के समापन का प्रतीक मानी जाती है. माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश और मा लक्ष्मी की संयुक्त पूजा से संपत्ति, सुख और व्यवसायिक लाभ प्राप्त होता है. इस दिन घर या दुकान में नया लेखा-जोखा प्रारंभ करना, सोना या वस्त्र खरीदना या नए सौदे करना ग्रहों की दृष्टि से शुभ परिणाम देता है. इस दिन किसी भी नए कार्य, व्यवसाय या सौदे की शुरुआत को अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह उपचय भावों (3, 6, 10, 11 भाव) के सक्रिय होने का संकेत देती है.
गुजराती नववर्ष का पहला कार्य दिवस
यह पर्व विशेष रूप से गुजरात में मनाया जाता है और गुजराती नववर्ष के पहले कार्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. ज्यादातर व्यवसायी इस दिन अपने बिजनेस को नए सिरे से शुरू करते हैं. वे नई डायरी खोलते हैं, जिसके शुरू के पन्ने में बाईं ओर शुभ, दाईं ओर लाभ लिखते हैं और केंद्र में स्वास्तिक बनाकर कारोबार की शुरुआत करते हैं. मान्यता है कि यह परंपरा मुनाफे और समृद्धि का प्रतीक है.
मां लक्ष्मी का मिलता है आशीर्वाद
लाभ पंचमी के दिन कई शुभ कार्य किए जाते हैं, जो धन और सौभाग्य साथ लेकर आते हैं. इस दिन चांदी या पीतल का कछुआ खरीदकर घर लाना आर्थिक समृद्धि का सूचक माना जाता है. कारोबारी नई डायरी में शुभ-लाभ और स्वास्तिक लिखकर कारोबार का प्रारंभ करने के अलावा, मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाकर सात कन्याओं को भोग करवाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से कारोबार में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और धन की देवी मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. साथ ही, पूजा स्थल और तिजोरी में हल्दी की गांठ और फूल रखने से घर में बरकत बनी रहती है, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.

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News Desk

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