Thursday, March 5, 2026

ट्रम्प गोल्ड कार्ड के फैसले के खिलाफ अमेरिका के 20 राज्यों ने ठोका मुकदमा

वॉशिंगटन। अमेरिकी प्रशासन ने ट्रम्प गोल्ड कार्ड वीजा के आवेदनों पर 1 मिलियन डॉलर यानी करीब 9 करोड़ रुपए की फीस लगा दी है। इस फैसले के खिलाफ कैलिफोर्निया के नेतृत्व में कुल 20 अमेरिकी राज्यों ने कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का कहना है कि यह फीस गैर-कानूनी है और इससे अस्पतालों, स्कूलों, यूनिवर्सिटी और सरकारी सेवाओं में पहले से चल रही डॉक्टरों-शिक्षकों की कमी और गंभीर हो जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि ये वीजा डॉक्टर, नर्स, इंजीनियर, वैज्ञानिक और शिक्षक जैसे उच्च कुशल प्रोफेशनल्स के लिए होता है। दुनियाभर का टैलेंट जब अमेरिका आता है तो पूरा देश आगे बढ़ता है। कैलिफोर्निया के साथ न्यूयॉर्क, इलिनॉय, वॉशिंगटन, मैसाचुसेट्स समेत 20 बड़े राज्य इस मुकदमे में शामिल हैं। राज्यों का तर्क है कि पहले एच-1बी वीजा की फीस 1,000 से 7,500 डॉलर यानी 1 से 6 लाख रुपए के बीच होती थी, लेकिन संसद की मंजूरी के बिना अचानक फीस बढ़ा देना अवैध है। साथ ही यह फीस वीजा प्रोसेसिंग की वास्तविक लागत से सैकड़ों गुना ज्यादा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लंघन बताया। क्योंकि बिना नोटिस और पब्लिक कमेंट के इतना बड़ा नियम नहीं बनाया जा सकता।
रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा असर सरकारी और गैर-लाभकारी संस्थानों पर पड़ेगा। स्कूल, यूनिवर्सिटी और अस्पताल को वीजा में छूट मिलती थी, लेकिन अब एक-एक विदेशी टीचर या डॉक्टर लाने में 9 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इससे ये संस्थान या तो सेवाएं घटाएंगे या दूसरी जरूरी योजनाओं से पैसा काटेंगे। अमेरिकी शिक्षा विभाग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अमेरिका के करीब 75फीसदी डिस्ट्रिक्ट स्कूल को शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं। खासकर स्पेशल एजुकेशन, साइंस और बाइलिंगुअल शिक्षकों की भारी कमी है।
वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में 2024 में करीब 17,000 वीजा डॉक्टरों-नर्सों को दिए गए थे। साल 2036 तक अमेरिका में 86,000 डॉक्टरों की कमी हो सकती है, जो ग्रामीण और गरीब इलाकों में पहले से ही गंभीर है। अमेरिकी सरकार वीजा में फीस बढ़ोतरी को जायज बताती रही है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम वीजा प्रोग्राम के दुरुपयोग को रोकेगा। इसका साथ ही अमेरिकी नागरिकों के वेतन और नौकरियों की रक्षा करेगा। इसके उलट आलोचकों का कहना है कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। भारत जैसे देशों से आने वाले 70फीसदी से ज्यादा प्रोफेशनल्स पर इसका असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रोफेशनल अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप जैसे देशों की ओर जा सकते हैं। इसके साथ ही ट्रम्प प्रशासन वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया के पिछले 5 साल का रिकॉर्ड मांग रहा है। इससे जांच और सख्त हो जाएगी। कुल मिलाकर कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिका जाना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा और मुश्किल हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए अप्लाई प्रोसेस शुरू करने का ऐलान किया था। कार्ड की कीमत 1 मिलियन डॉलर यानी करीब 9 करोड़ रुपए है। हालांकि कंपनियों को कार्ड के लिए 2 मिलियन डॉलर देना होगा। ट्रम्प ने इसी साल फरवरी में ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा प्रोग्राम शुरू करने का ऐलान किया था।

Previous article800 साल पुराना है अमृतेश्वर मंदिर, गर्भगृह में त्रिमूर्ति शिवलिंग विराजमान, उल्टी दिशा में लिखी है रामायण
Next articleबेंगलुरु में पालतू मैकॉ को बचाना पड़ा भारी, मालिक की ऐसे चली गई जान
News Desk

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles