Tuesday, March 3, 2026

घर पर कर रहे हैं तुलसी-शालीग्राम विवाह तो इन नियमों का रखें खास ध्यान

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और द्वादशी तिथि को तुलसी-शालीग्राम विवाह किया जाता है. घर पर तुलसी-शालिग्राम विवाह करना अत्यंत पुण्यदायक कार्य बताया गया है, यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विष्णु-लक्ष्मी विवाह का प्रतीक है जो घर में सुख, सौभाग्य और समृद्धि को स्थिर करता है. चार माह की योगनिद्रा के बाद भगवान विष्णु के जागते हैं और सभी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि प्रारंभ हो जाते हैं. यही वजह है कि इस दिन घर या मंदिरों में तुलसी-शालीग्राम विवाह का किया जाता है. लेकिन अगर आप घर पर तुलसी-शालीग्राम विवाह कर रहे हैं तो आपको कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है. आइए जानते हैं तुलसी-शालीग्राम विवाह में किन बातों का ध्यान रखें.
तुलसी विवाह 2025 (Tulsi Vivah 2025)

द्वादशी तिथि की शुरुआत – 2 नवंबर, सुबह 7 बजकर 31 मिनट से
द्वादशी तिथि का समापन – 3 नवंबर, सुबह 5 बजकर 7 मिनट तक
साल 2025 में तुलसी विवाह 2 नवंबर दिन रविवार को किया जाएगा.

तुलसी पूजन मंत्र Tulsi Puja Mantra
ॐ तुलस्यै हरिप्रिया नमः।
ॐ तुलस्यै नम:।
ॐ तुलसीश्रियै नम:।
ॐ तुलसीदेव्यै नम:।
शालिग्राम पूजन मंत्र Shaligram Puja Mantra
ॐ श्री शालिग्राममाय नम।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
ॐ लक्ष्मीपति देवदेवाय नमः।
घर पर तुलसी विवाह के नियम Tulsi Vivah Rules

    तुलसी-शालीग्राम विवाह में शालीग्राम को अक्षत यानी चावल अर्पित ना करें. तुलसी विवाह में शालीग्राम को अक्षत अर्पित करना अशुभ माना जाता है. विवाह के दौरान आप केवल तुलसी दल, फूल और तिल अर्पित करें.
    तुलसी-शालीग्राम विवाह हमेशा प्रदोष काल में करना चाहिए. तुलसी विवाह हमेशा प्रदोष काल में ही किया जाता है.
    तुलसी विवाह में तुलसी माता को लाल चुनरी और सुहाग का सामान अर्पित करें. ऐसा करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. साथ ही कुंवारी कन्याएं अगर तुलसी माता को सुहाग का सामान अर्पित करती हैं तो अच्छी जीवनसाथी के योग बनेंगे.
    विवाह मंडप (तुलसी चौरा) के चारों ओर चार दिशाओं में 4-4 दीपक और मध्य में एक दीपक प्रज्वलित करें. तुलसी विवाह में गाय के घी का दीपक ही सर्वोत्तम माना जाता है. तुलसी के पास जलाया गया घी का दीप पवित्रता, संतति और समृद्धि तीनों का सूचक होता है.
    तुलसी-शालीग्राम विवाह के लिए गन्ने का मंडप तैयार किया जाता है और भोग में शकरकंद, सिंघाड़ा, पंचामृत, लड्डू आदि सात्विक चीजें अर्पित करें.
    घर के उत्तर या पूर्व दिशा में तुलसी चौरा को साफ जल से धोकर सजाएं और चौरे को गंगाजल से पवित्र करें.
    तुलसी चौरा के चारों ओर आम्रपत्र (आम के पत्ते) और आम्र-कलश लगाएं और शालिग्राम (भगवान विष्णु का स्वरूप) को पीले वस्त्र में रखें.

तुलसी-शालीग्राम विवाह के लाभ Benefits of Tulsi Vivah

    घर पर तुलसी-शालीग्राम विवाह करने से नकारात्मक ऊर्जा, वास्तु दोष, नजर दोष आदि चीजें दूर हो जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
    जिन लोगों के विवाह में देरी या बाधाएं आती हैं तो वे घर पर तुलसी विवाह अवश्य करें.
    घर पर तुलसी विवाह का आयोजन करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है और दंपत्तियों के बीच चल रहे तनाव भी दूर हो जाते हैं.
    जिन घरों में कन्यादान का अवसर नहीं मिलता, उनको अपने घरों में तुलसी विवाह का आयोजन अवश्य करवाना चाहिए. तुलसी विवाह से इस पुण्य का लाभ उठा सकते हैं.
    तुलसी विवाह करने से घर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है और धन व धान्य की कोई कमी नहीं होती. साथ ही परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम बना रहता है और उन्नति भी होती है.

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