Saturday, March 7, 2026

जयपुर में बनी, असम में कराई एंट्री

स्लीपर बसों का फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। अधिकांश स्लीपर बसें असम व अन्य राज्यों में रजिस्टर्ड है। लेकिन दौड़ राजस्थान में रही है। आरटीओ की जांच कार्रवाई में स्लीपर बसों के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। अतिरिक्त प्रादेशिक परिवहन अधिकारी की ओर से गलता गेट पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। जिसमें बताया है कि 18 अक्टूबर को दिल्ली रोड़ पर खोल के हनुमान जी चौराहे पर विजय लक्ष्मी बॉडी बिल्डिंग पर परिवहन निरीक्षक हरिसिंह मीणा ने जांच की। जैसलमेर हादसे के बाद यह निरीक्षण किया गया था। इस दौरान मौके पर चार वाहनों की बॉडी बन रही थी।

चारों वाहनों के चेसिस नंबर व इंजन नंबर की जांच की तो एक बस का फर्जीवाड़ा सामने आया। पंजीयन वाहन सॉफ्टवेयर 4.0 ने फर्जीवाड़ा पकड़ा। एक बस का चेसिस नंबर एमसी 2 आर 5 टीओटीडी 132060 व इंजन संख्या ई 426 सीडीटीडी 521953 था। जिसकी बॉडी का निर्माण जयपुर में हो रहा था। लेकिन यह बस सॉफ्टवेयर के अनुसार 8 अक्टूबर 2025 को असम के जिला कमरूप में पंजीकृ​त दर्शा रही थी। जिसके बाद गलता गेट पुलिस थाने मे बस संख्या एएस 01 टीसी 9149 के मालिक मनीष के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।

मुकदमे में बताया कि बस की बॉडी अभी बनी भी नहीं है। इसके बिना भौतिक सत्यापन के कैसे पंजीयन अधिकारी कमरूप, असम ने वाहन का पंजीयन कर दिया। ऐसे में साफ है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बस का पंजीयन असम में कराया गया है। पुलिस की ओर से मामले की जांच की जा रही है।

अधिकांश स्लीपर बसें फर्जी, भौतिक सत्यापन नहीं…
परिवहन विभाग का मानना है कि अधिकांश स्लीपर बसों में ऐसा फर्जीवाड़ा किया गया है। अधिकांश स्लीपर्स कभी दूसरे राज्यों में गई ही नहीं, जबकी दूसरे राज्यों में इनका पंजीयन हो गया। बगैर भौतिक सत्यापन के दूसरे राज्यों के परिवहन विभाग ने इन बसों का पंजीयन कर दिया। जिसके कारण इन स्लीपर्स में एग्जिट गेट नहीं होने सहित कई खामियां है। जो राजस्थान में परिवहन विभाग की जांच के दौरान पकड़ी जाती है।

दूसरे राज्यों में दलालों का खेल, टैक्स भी बच रहा…
दूसरे राज्यों में बैठे दलाल बगैर भौतिक सत्यापन के बसों का रजिस्ट्रेशन करा रहें है। स्लीपर बसों संचालकों की ओर टैक्स बचाने के चक्कर में पूरा खेल खेला जा रहा है। राजस्थान में होम टैक्स करीब 40 हजार रुपए महीना है। दूसरे राज्यों में यह टैक्स कम है। कई राज्यों में 4 हजार से लेकर 15 हजार रुपए तक भी है। आॅल इंडिया टूरिस्ट परमिट का टैक्स करीब तीन लाख है। लेकिन होम टैक्स बचाने के चक्कर में निजी बसें दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड हो रहीं है।

इनका कहना है…
एक बस का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। जिसकी बॉडी पूरी तरह से बनी भी नहीं और दूसरे राज्य में बगैर भौतिक सत्यापन के रजिस्ट्रेशन भी हो गया। पुलिस मामले की जांच कर रहीं है। दूसरी बसों की भी परिवहन विभाग जांच कर रहा है।

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News Desk

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