96 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, समस्तीपुर सहित संपूर्ण कला एवं संगीत जगत में शोक की लहर
समस्तीपुर, बिहार |
भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के प्रतिष्ठित विद्वान, समस्तीपुर महिला महाविद्यालय के संगीत विभाग के पूर्व अध्यक्ष, प्रख्यात सितार वादक, तबला वादक, शास्त्रीय गायन के मर्मज्ञ तथा चंडीगढ़ छाया स्कूल ऑफ आर्ट के सम्मानित एवं प्रख्यात सेंटर होल्डर प्रो. पंडित रामस्वार्थ ठाकुर ‘मतवाला’ जी का 96 वर्ष की आयु में उनके पैतृक गांव में निधन हो गया। उनके निधन से समस्तीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के संगीत एवं कला जगत में गहरा शोक व्याप्त है।
पंडित रामस्वार्थ ठाकुर ‘मतवाला’ जी संगीत की एक जीवंत पाठशाला थे। शास्त्रीय गायन, ख्याल, टप्पा, ठुमरी, सितार एवं तबला वादन सहित संगीत की विभिन्न विधाओं पर उनका असाधारण अधिकार था। उन्होंने अपने दीर्घ जीवन में हजारों विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा देकर भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध किया।
चंडीगढ़ छाया स्कूल ऑफ आर्ट से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने एक आदर्श सेंटर होल्डर के रूप में कला एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके मार्गदर्शन और समर्पण ने अनेक कलाकारों को नई दिशा प्रदान की।
उनके शिष्यों, सहयोगियों और संगीत प्रेमियों के अनुसार, वे केवल एक शिक्षक नहीं बल्कि एक प्रेरणास्रोत, संरक्षक और सच्चे गुरु थे। 96 वर्ष की आयु तक उनकी सक्रियता, संगीत साधना और ज्ञानार्जन की निरंतरता सभी के लिए अनुकरणीय रही।
उनके निधन पर चंडीगढ़ छाया स्कूल ऑफ आर्ट परिवार, समस्तीपुर महिला महाविद्यालय तथा समस्त संगीत जगत ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
“पंडित रामस्वार्थ ठाकुर ‘मतवाला’ जी का जाना भारतीय संगीत जगत की एक अपूरणीय क्षति है। उनकी कला, शिक्षा और संस्कारों की विरासत सदैव आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।”
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः। 🙏🕯️
